लखनऊ में वायु प्रदूषण : समस्या और समाधान के कुछ उपाय: 2

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समाधान के कुछ प्रयास :-

लखनऊ का वायु प्रदूषण धीरे-धीरे गंभीर स्वरूप लेता जा रहा है I अब हम सभी को इस दिशा में सचेत होकर प्रयास करने की जरूरत है I इन प्रयासों को हम दो वर्गों में वर्गीकृत कर सकते हैं, जैसेकि -तात्कालिक समाधान एवं दीर्घकालिक समाधान

तात्कालिक समाधान :- तात्कालिक समाधान के रूप में हमें निम्नलिखित प्रयास करने की आवश्यकता है I

सार्वजनिक यातायात को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है और निजी यातायात को हतोत्साहित करने की जरूरत है I जैसा कि एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट ने अपने विभिन्न आदेश में कहा है 10 साल से पुराने डीजल वाहन और 15 साल से पुराने पेट्रोल वाहन के प्रयोग को निषेध किया है I इसका हमें कड़ाई से पालन करवाने की आवश्यकता है I शहर में अपंजीकृत वाहन धड़ल्ले से चल रहे हैं, इन पर कठोर नियंत्रण की आवश्यकता है I जाम से निपटने के लिए समुचित व्यवस्था करने की जरूरत है, क्योंकि देखा गया है कि जाम के दौरान इंजन देर तक स्टार्ट रहने से सबसे ज्यादा प्रदूषण होता है I

आजकल धीरे-धीरे ई रिक्शा का प्रचलन बढ़ रहा है I इस दिशा में ई रिक्शा के प्रचलन को अधिक से अधिक संस्थागत बनाने की जरूरत है और उनके प्रयोग को वैज्ञानिक स्वरूप देने की आवश्यकता है I ई-रिक्शा का प्रयोग वायु प्रदूषण रोकने की दिशा में एक एक अच्छा विकल्प है I ज्ञातव्य है कि भारत सरकार ने 2030 तक इलेक्ट्रिक वाहनों का प्रयोग करने का संकल्प जारी किया है I

वायु प्रदूषण कम करने के लिए ज्यादा से ज्यादा वृक्षारोपण कार्यक्रम चलाये जाते है किन्तु वृक्षारोपण के बाद वृक्षों की देखभाल की और ध्यान नहीं दिया जाता है I हमें इस तरफ विशेष ध्यान देने की जरूरत है क्योंकि विकसित वृक्ष ही वायु प्रदूषण को कम करेंगें I

इस दिशा में कई देश ग्रीन बिल्डिंग बनाने की बात कर रहे हैं I हमें भी इस दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत है I अभी हाल ही में लुधियाना में इनकम टैक्स ऑफिस को ग्रीन बिल्डिंग का स्वरूप दिया गया है, जो अख़बार में चर्चा का विषय बना I

लखनऊ शहर में साफ-सफाई की बात जब आती है तो नगर निगम की ओर इशारा किया जाता है I ठीक है कि नगर निगम के कार्य में थोड़ी लापरवाही है लेकिन इसके साथ लखनऊ नगर वासियों का भी योगदान है I अब हमें इस तरह सोचने की आवश्यकता है किन वस्तुओं का प्रयोग करने से प्रदूषण ज्यादा होगा और किसका प्रयोग करने से कम होगा I और यदि हम कम प्रदूषण फ़ैलाने वाले वस्तुओं का प्रयोग करेंगें तो प्रदूषण में निश्चित रुप से कमी आएगी I

दीर्घकालिक समाधान :-

दीर्घकालिक समाधान के रूप में जिस मॉडल का वर्णन करने का प्रयास किया जा रहा है, प्रबल सम्भावना है कि वह वायु प्रदूषण को खत्म कर स्वस्थ वातावरण का निर्माण कर सकता है।

अब हमें वर्तमान शहरी विकास के मॉडल पर पुनः चिंतन करने की आवश्यकता है I यह देखने की आवश्यकता है कि शहर में लोग आखिर दिन-रात क्यों चलते रहते हैं, कौन सी आवश्यकता है जो उनको चलाती रहती है । जैसे कि पहली रोजगार दूसरी मार्केटिंग तीसरी स्कूलिंग चौथी स्वास्थ्य।  यदि हम शहर के स्वरूप को स्थानीकरण देने का प्रयास करें तो  लोग गाड़ियों के प्रयोग से परहेज करने लगे I जैसे कि जिस जिस केंद्र पर रोजगार मिलती है और उन कार्यालयों में काम करने वाले स्टाफ को रोजाना आवागमन करना पढता है I अगर कार्यालय से थोड़ी दूर पर उनके आवास की व्यवस्था हो या कार्यालय से उनके घर तक आने जाने की सार्वजनिक यातायात की व्यवस्था हो तो निजी वहां के प्रयोग में निश्चित कमी आयेगी I पुनः शहर के चारो और फैले बड़े – बड़े सेक्टरों (जैसे किसी केद्र से दो किलोमीटर की त्रिज्या में ) मौजूद आवासीय क्षेत्रों के पास में ही स्कूल और बाजार और एक मिडिल लेवल का हेल्थ सिस्टम मौजूद हो और लोगों का विश्वास हो कि यहां पर वही सुविधा व् गुणवत्ता उपलब्ध है, जो शहर के दूसरे हिस्से में मौजूद है तो लोग शहर के इस कोने से दूसरे कोने पर जाने का विचार नहीं करेंगे I तब लोग अपने न ही बच्चो को अच्छी शिक्षा के नाम लारोटो स्कूल भेजना पसंद करेगें और न ही सस्ती खरीददारी के नाम पर अमीनाबाद  जाना पसंद करेंगें I इस विकास मॉडल  से वायु प्रदुषण को ख़त्म किये जाने की प्रबल सम्भावना है I

निष्कर्ष :-

लखनऊ में होने वाले प्रदूषण पर विभिन्न दृष्टिकोण से विचार करने के उपरांत, निश्चित रूप से हम कह सकते हैं कि अगर हम अब नहीं जागेगें, तो देर हो सकती है । सोचिए हम आने वाली पीढ़ी को क्या देंगे “जहरीली हवा” या एक “स्वस्थ वातावरण” देना चाहेंगे । हम लोग एक स्वर में जरूर कहेंगे कि हां हम उन्हें एक स्वस्थ और उत्तम वातावरण देना चाहेंगे । अतः हम सभी लोगों को मिलकर, लोगों को जागरूक करने की जरूरत है तथा वायु प्रदूषण को खत्म करने के लिए मिलकर के प्रयास करने की आवश्यकता है।

लखनऊ में वायु प्रदूषण : समस्या और समाधान के कुछ  उपाय: 1

By: Surya Kant Singh (Section Officer, NBRI, Lucknow)

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