लखनऊ में वायु प्रदूषण : समस्या और समाधान के कुछ  उपाय: 1

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भूमिका :-

आजकल किसी न किसी माध्यम से वायु प्रदूषण की बात सुनाई देने लगी है चाहे वह बातचीत हो समाचारपत्र या टीवी हो सभी पर वायु प्रदूषण की बात की जा रही है तथा उससे  होने वाले नुकसान की भी चर्चा की जा रही है I

पहले जब लखनऊ का नाम जेहन में आता था तब “पहले आप – पहले आप” की संस्कृति का नाम, हजरतगंज की सुहानी शाम, राजधानी तथा सुविधाओं से संपन्न नगर के रूप में उसकी छवि उभरती थी , किंतु आजकल जाम, बढ़ती आबादी, अवैध कालोनियों में बेतहाशा वृद्धि तथा वायु प्रदूषण जैसी विशिष्टाओं के साथ छवि उभरती है। कुछ साल पहले जब दिल्ली के वायु प्रदूषण की बात होती थी तो लगता था किसी ऐसी समस्या का जिक्र हो रहा है, जिनसे हमारा कोई सरोकार नहीं है । किन्तु आज लखनऊ में वायु प्रदूषण का स्तर दिल्ली के वायु प्रदूषण के स्तर के पास पहुंचने लगा है । एक समाचार पत्र ने इस मुद्दे को कुछ इस तरह से उठाया है कि मास्क में मुस्कुराते हुए युवक का चेहरा लगा कर कहा है कि “अब यू मुस्कुराइए कि आप लखनऊ में हैं।“

वायु प्रदूषण से होने वाले नुकसान:-

किसी समस्या की व्यापकता अथवा भयावहता का अनुमान उससे होने वाले नुकसान से लगाया जा सकता है।

वायु प्रदूषण से सर्वप्रथम सभी को श्वसन संबंधी बीमारियां होने की संभावना है। वायु प्रदूषण में दो विशेष तरह की कणों की माफ की जा रही है जैसे पीएम 2.5 तथा पीएम 10। वैज्ञानिक शोध के आधार पर कहा जा रहा है कि पीएम 2.5 एवं पीएम 10 की माप स्केल स्तर पर क्रमशः 50 एवम 100 से कम हो तो हवा स्वास्थ्यकर मानी जाती है। अन्यथा स्थिति में वायु  प्रदूषण के श्रेणी में आती है तथा स्वास्थ्य के लिए घातक होती है। निर्धारित मानक से अधिक होने पर ये कण श्वसन नली में प्रवेश कर जाते हैं और तरह-तरह की बीमारियां जैसे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, सीओपीडी आदि को जन्म देते हैं।

स्वास्थ्य वायु की अपेक्षा प्रदूषित वायु में रहने से श्वसन रोगों के साथ-साथ हृदय रोग का भी खतरा होता है।

नवीन शोधों के आधार पर कहां जा रहा है कि वायु प्रदूषण मानसिक मानसिक रोगों को भी जन्म देते हैं।

सबसे गंभीर बात यह है कि वायु प्रदूषण नौनिहालों के फेफड़ों पर गंभीर असर डाल रहा है क्योंकि बच्चों के फेफड़े विकास की अवस्था मे होते हैं। शोधों का आधार पर पाया गया है कि प्रदूषण से फेफड़े का ग्रोथ जिस स्तर से होना चाहिए नहीं हो पाता है और स्वस्थ पर्यावरण में रहने वाले बच्चों की तुलना में प्रदूषित वायु में रहने वाले बच्चों के फेफड़े कम विकसित होते हैं। वायु प्रदूषण बच्चों में गंभीर बीमारियां जैसे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, सीओपीडी को जन्म दे रही हैं।

कारण :-

किसी समस्या का समाधान तभी संभव है, जब हम उसके कारणों को ठीक से समझ सके I अतः लखनऊ में होने वाले वायु प्रदूषण के कारण को समझना यहां समीचीन हो जाता है I लखनऊ में होने वाले वायु प्रदूषण के लिए निम्न कारण जिम्मेदार हैं I

      लखनऊ में होने वाले वायु प्रदूषण के लिए सर्वप्रथम यातायात के साधन ही जिम्मेदार हैं I आज जिधर देखिए उधर ही जाम ही जाम है और गाड़ियों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि होती जा रही है और इनमें से वह गाड़ियां और भी समस्या को जटिल बना रही हैं जो फिटनेस के मानक पर उपयुक्त नहीं है I

लखनऊ में वायु प्रदूषण के लिए दूसरा प्रमुख कारण निर्माण गतिविधियां हैं I आज लखनऊ में हर तरफ छोटे व् बड़े निर्माण कार्य चल रहे हैं I निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा के मानकों का पालन ना करने से वायु में महीन कणों की संख्या बढ़ती जा रही है, जिससे प्रदूषण में इजाफा हो रहा है I

      कूड़े का समुचित प्रबंधन न किए जाने से भी वायु प्रदूषण में इजाफा हो रहा है I पॉलीथिन का धड़ल्ले से प्रयोग होता जा रहा है, जिनका थोड़े समय के लिए उपयोग के पश्चात डस्टबिन के हवाले कर दिया जाता है। कूड़े व पॉलीथिन को खुले में जलाए जाने से वायु प्रदूषण में वृद्धि हो रही है।

By: Surya Kant Singh (Section Officer, NBRI, Lucknow)

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